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आजम ने कहा- प्रणब को संघ की दावत कुबूलने का इनाम मिला; ओवैसी ने भी सवाल उठाए

सपा नेता आजम खान ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न दिए जाने पर सवाल उठाए हैं। आजम ने कहा कि इसमें कोई राजनीति नहीं है। प्रणब ने संघ की दावत कुबूल की थी और एक कार्यक्रम में उनके हेड क्वार्टर गए थे, यह (भारत रत्न) उसी का इनाम है। उधर, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पूछा- भारत रत्न जितने लोगों को दिया गया, उनमें से कितने दलितों, आदिवासियों, मुसलमानों, गरीबों, सामान्य वर्ग और ब्राह्मणों को दिए गए? केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारक नानाजी देशमुख और गायक भूपेन हजारिका को भारत रत्न देने का ऐलान किया था। नानाजी देशमुख और भूपेन हजारिका को मरणोपरांत यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलेगा। डॉ. मुखर्जी को भारत रत्न क्यों मिला उन्हें खुद समझ में नहीं आया- आजम आजम खान ने कहा, "डॉ. मुखर्जी को जब भारत रत्न दिए जाने की सूचना मिली थी तो उन्होंने कहा था- मैं नहीं जानता कि क्या मैं इसके लायक हूं। शायद उन्हें भी समझ नहीं आया की भाजपा सरकार ने उन्हें भारत रत्न क्यों दिया।' खान ने भाजपा के प. बंगाल में...

कॉन्स्टेबल ने स्तनपान करवाकर बचाई लावारिस बच्ची की जान

बेंगलुरु में एक महिला पुलिस कॉन्स्टेबल ने लावारिस छोड़ दी गई एक बच्ची को स्तनपान करवाकर उसकी जान बचाई है. कॉन्स्टेबल ने ऐसा तब किया जब वह अपनी ड्यूटी के सिलसिले में अस्पताल आई थीं. बुधवार सुबह पुलिस स्टेशन ने संगीता हलीमणि को यह ज़िम्मेदारी सौंपी थी कि वो उत्तर बेंगलुरु के येलाहंका स्थित सरकारी अस्पताल जाकर वहां भर्ती की जा रही लावारिस बच्ची के बारे में जानकारी जुटाए. संगीता ने बीबीसी हिंदी को बताया, "जब मैं वहां पहुंची तो देखा कि वे उसे ग्लूकोज़ ड्रिप चढ़ा रहे थे. घर पर मेरा 10 महीने का बच्चा है. ऐसे में मैंने उनसे पूछा कि क्या मैं इसे दूध पिला सकती हूं. डॉक्टरों ने इसकी इजाज़त दे दी." यह बच्ची सुबह-सुबह सैर पर निकले एक शख़्स को कृषि विश्वविद्यालय के परिसर में लावारिस हालत में मिली थी. 25 साल की महिला पुलिस कॉन्स्टेबल ने बताया, "वह धूल और गंदगी से सनी हुई थी. चींटियों ने भी बच्ची को काट लिया था." बच्ची को स्तनपान करवाने के बाद उसे शहर के रेफ़रल सरकारी अस्पताल 'वाणी विलास अस्पताल' में शिफ्ट कर दिया क्योंकि उसे इन्फ़ेक्शन होने का ख़तरा था. येला...

आपको पता है आपकी और बॉस की सैलरी में कितना अंतर है?

नया साल शुरू हो चुका है. आपने अपने पिछले साल की बचत को देख लिया होगा. अब अगले 12 महीनों में आपको अपने वेतन के बढ़ने की उम्मीद भी होगी. अगर आप ब्रिटेन में रह रहे हों तो, ये जानकर आप अचरज में पड़ जाएंगे कि अगले 12 महीने में जो भी आपकी कुल आमदनी होगी, उससे कहीं ज़्यादा पैसा आपके बॉस ने साल के पहले चार दिनों में कमा लिया है. अगर आप भारत में रह रहे हैं तो आपको यहां की हक़ीक़त जानकर शायद ही यक़ीन होगा. उसकी बात करेंगे लेकिन पहले बात ब्रिटिश कंपनियों के अधिकारियों की. ब्रिटेन की बड़ी कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी चार जनवरी को उतना पैसा पाते हैं, जितना उनकी कंपनी में काम कर रहे औसत कर्मचारी का सालाना वेतन होता है. चार जनवरी को ब्रिटिश कॉरपोरेट दुनिया में इस दिन का जश्न मनाया जाता है. लेकिन यह केवल ब्रिटिश मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) का सच नहीं है, दुनिया भर के सीईओ, अपने कर्मचारियों की तुलना में कई गुना ज़्यादा पैसा कमाते हैं. सैलेरी में ज़मीन आसमान का फ़र्क फ़ाइनेंशियल मीडिया कंपनी ब्लूमबर्ग ने दुनिया के 22 देशों की प्रमुख कंपनियों के सीईओ और उनके कर्मचारियों के बी...

नज़रियाः अगर लोकसभा चुनाव मोदी बनाम राहुल न हुए तो

नये साल के पहले दिन एक समाचार एजेंसी को दिए इंटरव्यू में प्रधानमंत्री ने अयोध्या में राम मंदिर के सवाल पर संकेत दिया कि उनकी सरकार इस मुद्दे पर दबाव में है. प्रधानमंत्री से सवाल था कि राम मंदिर क्यों एक भावनात्मक मुद्दा बनकर रह गया है. कुछ होता क्यों नहीं. उन्होंने जवाब की शुरुआत इस बात से की कि तीन तलाक़ पर अध्यादेश सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद आया. इसे इस बात का संकेत मानने में कोई हर्ज नहीं है कि राम मंदिर पर अध्यादेश लाने के लिए सरकार तैयार है. यहां तक तो कोई समस्या नहीं है. समस्या आगे आ सकती है. यदि चार जनवरी को सुप्रीम कोर्ट बेंच गठित करके रोज़ सुनाई के लिए तैयार हो जाता है तो सरकार का काम आसान हो जाएगा. पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई टाल देता है या सुनवाई पूरी करके फ़ैसला सुरक्षित रख लेता है तो सरकार और भाजपा सहित पूरे संघ परिवार के लिए भारी संकट पैदा हो जाएगा. प्रधानमंत्री से सवाल था कि राम मंदिर क्यों एक भावनात्मक मुद्दा बनकर रह गया है. कुछ होता क्यों नहीं. उन्होंने जवाब की शुरुआत इस बात से की कि तीन तलाक़ पर अध्यादेश सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद आया. इसे इस बा...

पांचों नगर निगम भाजपा जीती, पानीपत में अवनीत कौर रिकॉर्ड 74 हजार वोटों से विजयी

हरियाणा में पानीपत, करनाल, हिसार , रोहतक और यमुनानगर में हुए नगर निगम चुनाव में भाजपा को जीत मिली। यहां मेयर के लिए पहली बार सीधे चुनाव हुए। इससे पहले पार्षद मेयर का चुनाव करते थे । निकाय चुनावों के लिए 16 दिसंबर को वोट डाले गए थे। भाजपा ने अपने प्रत्याशी उतारे थे। कांग्रेस, इनेलो और बसपा ने निर्दलियों को समर्थन दिया था। 5 नगर निगम में भाजपा के मेयर पानीपत: अवनीत कौर ने कांग्रेस समर्थित कैंडिडेट अंशु कौर पाहवा को रिकॉर्ड 74,940 वोट से हराया। करनाल: रेणु बाला गुप्ता को 69,960 वोट मिले । उन्होंने इनेलो-बसपा और कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार आशा वधवा को 9,348 वोट से हराया। हिसार: गौतम सरदाना को 68,196 वोट मिले। उन्होंने रेखा ऐरन को 28,091 वोट से हराया। रोहतक: मनमोहन गोयल को 65,822 वोट मिले । उन्होंने कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार सीताराम सचदेवा को 14,776 वोट से हराया। यमुनानगर: मदन चौहान को 91,642 वोट मिले। उन्होंने कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार राकेश शर्मा उर्फ काका को 40,678 वोट से हराया।  हुड्डा के गढ़ में भी कांग्रेस हारी भूपेंद्र सिंह हुड्डा के गढ़ रोहतक में भाजपा ने मनमोहन गोय...

कांग्रेसी पिता की सीट पर बीजेपी की इकलौती मुस्लिम उम्मीदवार

मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने सभी 230 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं मगर इनमें भोपाल की एक सीट पर सबकी नज़र रहेगी. क्योंकि ये अकेली सीट है जहाँ से पार्टी ने किसी मुस्लिम उम्मीदवार को मैदान में उतारा है. फ़ातिमा रसूल सिद्दिक़ी नॉर्थ-भोपाल सीट से बीजेपी की उम्मीदवार हैं. और यहाँ का चुनाव ना केवल बीजेपी के लिए बल्कि वहाँ से उसके उम्मीदवार के लिए भी नाक की लड़ाई जैसा बन चुका है. पार्टी के लिए इसलिए क्योंकि पिछले 15 सालों से सत्ता में होने के बावजूद बीजेपी यहाँ कभी नहीं जीत सकी. शेर-ए-भोपाल कहलानेवाले रसूल अहमद सिद्दिक़ी यहाँ से दो बार कांग्रेस के विधायक रहे थे और मंत्री भी बने. पर 1993 में आरिफ़ अकील की वजह से उनकी हार हुई. साल 1993 में फ़ातिमा के पिता कांग्रेस के उम्मीदवार थे. बीजेपी की ओर से रमेश शर्मा और जनता दल की ओर से अक़ील चुनाव मैदान में थे. इस चुनाव में अक़ील की वजह से कांग्रेस के वोट कट गए थे, जिसका फ़ायदा बीजेपी को मिला और रमेश शर्मा जीत गए. उस चुनाव के 25 साल बाद बीजेपी ने आरिफ़ अकील को टक्कर देने के लिए बीजेपी ने रसूल अहमद सिद्दिक़ी की बेटी फ़ातिमा ...

अमरीका के मध्यावधि चुनाव में भारतीय मूल के लोगों का दबदबा

अमरीका में 6 नंवबर को अमरीकी कांग्रेस या प्रतिनिधि सभा और सीनेट की कुछ सीटों के लिए मतदान हो रहे हैं. इस चुनावी दंगल में अमरीका की प्रतिनिधि सभा के लिए सबसे अधिक भारतीय मूल के कूल 12 उम्मीदवार अपनी क़िस्मत आज़मा रहे हैं. इनमें सबसे अहम एरिज़ोना प्रांत में हीरल तिपिर्नेनी डिस्ट्रिक्ट आठ से डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार हैं जो रिपब्लिकन पार्टी की मौजूदा सांसद डेबी सेल्को को कड़ी टक्कर दे रही हैं. एरिज़ोना प्रांत को रिपब्लिकन पार्टी का गढ़ माना जाता है तो ऐसे में एक भारतीय मूल के उम्मीदवार की हैसियत से हीरल तिपिर्नेनी अपना अनुभव बताते हुए कहती हैं कि एरिज़ोना में अब तक किसी ने रिपब्लिकन पार्टी को ऐसी चुनौती नहीं दी. हीरल तिपिर्नेनी कहती हैं, "अभी भी एरिज़ोना में यह बहुत कम ही नज़र आता है कि भारतीय मूल के लोग चुनाव में खड़े हों.... लेकिन हम इस बार पिछले कई वर्षों में पहली बार रिपब्लिकन पार्टी को ऐसी चुनौती दे रहे हैं जो अब तक नहीं दी गई...हम कांटे की टक्कर दे रहे हैं." पेशे से डॉक्टर हीरल तिपिर्नेनी बताती हैं कि उनके मुख्य चुनावी मुद्दे हैं स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षे...